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छत्तीसगढ़( Chhattisgarh) भारत का एक राज्य है। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवम्बर 2000 को हुआ था। यह भारत का 26वां राज्य है। भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदल गया - एक तो 'मगध' जो बौद्ध विहारों की अधिकता के कारण 'बिहार' बन गया और दूसरा 'दक्षिण कौशल' जो छत्तीसगढ़ों को अपने में समाहित रखने के कारण 'छत्तीसगढ़' बन गया। किन्तु ये दोनों ही क्षेत्र अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारत को गौरवान्वित करते रहे हैं। 'छत्तीसगढ़' तो वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों के विकास का केन्द्र रहा है। यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष इंगित करते हैं कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000  (84वाँ संविधान संशोधन: अनुच्छेद 03 के तहत् राज्यों का गठन)  द्वारा भारत के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश से पृथक होकर 01 नवम्बर, 2000 को 31 अक्टूबर की मध्यरात्रि से भारतीय संघ का 26वाँ राज्य बना। साथ ही 09 नवम्बर - 'उत्तराखण्ड (27वाँ)' राज्य एवं 15 ...

कहानी छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद की,कहानी वीर नारायण सिंह की।

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  खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,   मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,   करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,   तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है।  छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह का जन्म सन् 1795 में सोनाखान के जमींदार रामसाय के हर हुआ था। वे बिंझवार आदिवासी समुदाय के थे। वे अपने पिता की तरह ही वीर साहसी तथा देशभक्त थे। पिता की मृत्यु के पश्चात 1830 में वे सोनाखान के जमींदार बने। वीर नारायण सिंह स्वभाव से परोपकारी, न्यायप्रिय तथा कर्मठ वीर नारायण जल्द ही लोगों के प्रिय जननायक बन गए। लोग उन्हें गोंडवाना का शेर कहते थे। 1856 में छत्तीसगढ़ भयंकर अकाल की चपेट में आ गया।, अकाल और अंग्रेजो की नीतियों के कारण प्रांत वासी भुखमरी का शिकार हो रहे थे। कसडोल के व्यापारी माखन का गोदाम अन्न से भरा था। वीर नारायण ने उससे अनाज गरीबों में बांटने का आग्रह किया लेकिन वह तैयार नहीं हुआ। इसके बाद प्रजाहितैषी वीर नारायण सिंह ने माखन के गोदाम से अनाज निकाल दाने दाने के लिए तरस रहे ग्रामीणों में बंटवा दिया। व्यापारी माखन ने इसकी शिकायत अंग्रेजो से ...